hindi story khush rahane ka raaz

 hindi story khush rahane ka raaz - खुश रहने का राज़ हिंदी स्टोरी 

                                                               

अपने जीवन में हर कोई ख़ुश रहना चाहता है। लेकिन खुश कैसे रहें यह नहीं पता होने के कारण बहुत से लोग अपने दुःखों से ही नहीं निकल पाते है आज की यह कहानी से आप को दुःखों से निकलने और ख़ुश रहने में कुछ मदद मिल सकती है। 

khush rahane ka raaz hindi story
khush rahane ka raaz hindi story

एक समय की बात है ,देव ऋषि नारद जी कहीं जा रहे थे। तभी उन्हें रास्ते में एक राजा मिलते है जो किसी कारण से बहुत दुःखी हुए होते हैं। नारद जी उस राजा को देख कर वहाँ रुकते है और उस से दुःखी होने का कारण पूछते है। इस पर वह राजा नारद जी से बोलता है की हे नारद जी मैं इस दुनिया से बहुत दुखी हूँ।

 कृप्या आप मुझे अपने दुःख को दूर करने और हमेसा खुश रहने का राज़ बताएं। इस पर उस राजा को देव ऋषि नारद जी ने कहा की तुम दुनिया के कारण दुःखी नहीं खुद के कारण दुःखी हो।देव ऋषि नारद जी की यह बात उस राजा को समझ नहीं आई। और उस राजा ने देव ऋषि नारद जी को ओर सरलता से समझाने का निवेदन किया। 

राजा की बात सुनकर देव ऋषि नारद जी ने उसे अपने पीछे आने को कहा। कुछ दूर चलने पर देव ऋषि नारद जी ने उस राजा को रास्ते में पड़े एक पेड़ की कुछ भरी तने को उठाने और उसे अपने खंधे पर रख कर अपने पीछे आने को कहा। राजा ने ऐसा ही किया। कुछ दूरी तक तो राजा  ठीक से चला लेकिन कुछ समय बाद उसके कंधे दर्द करने लगे।

 इस पर राजा ने देव ऋषि नारद जी से कहा की मेरे कंधे दुखने लगे हैं ,इस पर देव ऋषि नारद जी ने राजा को वह लकड़ी का भारी तना नीचे रखने को कहा। वह भारी लकड़ी का तना नीचे रखते ही राजा को बहुत ही राहत का अनुभव हुआ। और उसने राहत की सांस भरी। राजा की और देख कर, देव ऋषि नारद जी ने राजा से कहा हे राजा तुमने जो प्रश्न मुझसे पूछा था ,यही उसका जवाब है , यही है खुश रहने का राज़। 

राजा ने कहा –  मैं समझा नहीं। तो देव ऋषि नारद जी ने कहाजिस तरह इस भरी लकड़ी के तने को कुछ दूरी तक कंधे में रखने पर थोडा सा दर्द होता है और अगर इसे अधिक दूरी तक कंधे  में रखें तो थोडा ज्यादा दर्द होता है और अगर इसे और ज्यादा दूरी  तक उठाये रखेंगे तो दर्द बढ़ता जायेगा उसी तरह दुखों के बोझ को जितने ज्यादा समय तक उठाये रखेंगे उतने ही ज्यादा हम दु:खी और निराश रहेंगे। 

यह हम पर निर्भर करता है कि हम दुखों के बोझ को कुछ समय  तक उठाये रखते है या उसे जिंदगी भर । अगर तुम खुश रहना चाहते हो तो दु:ख रुपी  लकड़ी के भरी तने को जल्दी से जल्दी नीचे रखना सीख लो और हो सके तो उसे उठाओ ही नहीं। इसे अपने जीवन में अभी से अपना लो ताकि तुम्हारा दुःख दूर हो सके। और अपनी सारी प्रजा को भी बताओ।  खुश रहने का राज़ जान कर राजा ने देव ऋषि नारद जी धन्येवाद दिया और अपने दुःखों को भूल कर अपने राज्य की ओर निकल गया।