motivational Hindi story- प्रेरणा दायक कहानी

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निर्भयता और आत्मविश्वास 

स्वयं की सहायता करने वाली प्रेरणा दायक कहानी                                                                         

निर्भयता और आत्मविश्वास मनुष्य के सबसे बड़े हतियार है ,निर्भयता और आत्मविश्वास के दम पर मनुष्य अपनी राह पर आने वाले सभी चुनौतियों को पार कर अपनी मंजिल को पाता है। आज हम एक कहानी के माध्यम से निर्भयता और आत्मविश्वास के महत्व को जानेंगे। 

एक बार एक व्यापारी व्यापार में घाटे के चलते  पूरी तरह से कर्ज से डूब गया था और उसका व्यापार बंद होने के कगार पर था ।  एक दिन वह व्यापारी बहुत चिंतित व निराश होकर एक बगीचे में बैठा था ,और सोच रहा था कि काश कोई उसके  व्यापार को बंद होने से बचा ले।उसी time  एक व्यक्ति वहां पर आया और बोला – आप बहुत चिंतित लग रहे है,आप अपनी  चिंता समस्या मुझे बताइये शायद मैं आपकी कुछ  मदद कर सकूं। 

यह सुन कर व्यापारी ने अपनी समस्या उस  व्यक्ति को बताई। 

व्यापारी की समस्या सुनकर  व्यक्ति ने अपनी जेब से चेकबुक निकाली और एक चेक लिखकर व्यापारी को दे दिया और कहा – तुम यह चेक रखो इसका उपयोग कर अपने व्यापर को आगे बढ़ाओ और ठीक एक वर्ष बाद हम यहाँ फिर मिलेंगे तो तुम मुझे यह पैसे वापस लौटा देना। 

व्यापारी ने चेक देखा तो उसकी आँखे फटी रह गयी  उसके हाथों में 60 लाख का चेक था जिस पर उस शहर के सबसे अमीर व्यक्ति  के साइन थे। उस व्यापारी को यह विश्वास नहीं हो पा रहा था कि वह व्यक्ति और कोई नहीं बल्कि उस शहर का सबसे अमीर व्यक्ति जॉन रोकफेलर था। उसने उस व्यक्ति को आस-पास देखा लेकिन वह व्यक्ति वहां से जा चुका था। 

व्यापारी बहुत खुश था कि अब उसकी सारी चिंताएं समाप्त हो गयी है और अब वह इन पैसों से अपने व्यवसाय को फिर से खड़ा कर देगा। लेकिन उसने निर्णय किया कि वह उस चेक को तभी इस्तेमाल करेगा जब उसे इसकी बहुत अधिक आवश्यकता होगी और उसके पास कोई दूसरा उपाय नहीं होगा। 

उस व्यापारी की निराशा और चिंताएं दूर हो चुकी थी।  अब वह निडर होकर अपने व्यापार को नए आत्मविश्वास के साथ चलाने लगा क्योंकि उसके पास 50 लाख रूपये का चेक था जो जरूरत पड़ने पर काम आ सकता था। 

उसने कुछ ही महीनों में व्यापारियों के साथ अच्छे समझौते कर लिए जिससे धीरे धीरे उसका व्यापार फिर से अच्छा चलने लगा और उसने उस चेक का इस्तेमाल किये बिना ही अपना सारा कर्जा चुका दिया। 

ठीक एक वर्ष बाद व्यापारी वही चेक लेकर उस बगीचे में पहुंचा जहाँ पर एक वर्ष पहले वह व्यक्ति उससे मिला था। वहां पर उसे वह व्यक्ति मिला, व्यापारी ने चेक वापस करते हुए कहा – धन्यवाद आपका जो आपने बुरे वक्त में मेरी मदद की,आपके इस चेक ने मुझे इतनी हिम्मत दी कि मेरा व्यवसाय फिर से खड़ा हो गया और मुझे इस चेक का उपयोग करने की कभी जरूरत ही नहीं पड़ी। 

वह अपनी बात पूरी करता तभी वहां पर पास ही के पागलखाने के कुछ कर्मचारी आ पहुंचे और उस व्यक्ति को पकड़कर पागलखाने ले जाने लगे। यह देखकर व्यापारी ने कहा – यह आप क्या कर रहे है? आप जानते है यह कौन है? यह इस शहर के सबसे अमीर व्यक्ति जॉन रोकफेलर है। पागलखाने के कर्मचारी ने कहा – यह तो एक पागल है जो खुद को जॉन रोकफेलर समझता है, यह हमेशा भागकर इस बगीचे में आ जाता है और लोगों से कहता है कि वह इस शहर का मशहूर व्यक्ति जॉन रोकफेलर है।  हमें लगता है कि इसने आपको भी बेवकूफ बना दिया। 

वह व्यापारी पागलखाने के कर्मचारी की बाते सुनकर सुन्न हो गया। उसे यकीन नहीं हो पा रहा था कि वह व्यक्ति  जॉन रोकफेलर नहीं था और एक वर्ष से जिस चेक के दम पर वह आराम से अपने व्यापार में जोखिमें उठा रहा था वह नकली था। वह काफी देर सोचता रहा फिर उसे समझ में आया कि यह पैसा नहीं था जिसके दम पर उसने अपना व्यापार वापस खड़ा किया है बल्कि यह तो उसकी निर्भयता और आत्मविश्वास था जो उसके भीतर ही था। 

                                                                         
                                                           
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