पत्र-लेखन patra lekhan in hindi

patra lekhan in hindi  पत्र-लेखन



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hindi mein patra पत्र-लेखन की आवश्यकता

हम सब अपने निकट संबंधियों, इष्ट मित्रों से बराबर सम्पर्क रखना चाहते हैं। जो हमारे पास में ही रहते हैं, उनसे तो हम मिलते रहते हैं, किंतु जो हमसे दूर दूसरे नगर या गाँव में रहते हैं, उनको तो हम लिखकर ही अपनी कुशल-क्षेम भेज सकते हैं और लिखकर ही उनकी कुशल-क्षेम मँगा सकते हैं। इस प्रकार लिखकर विचारों का जो आदान-प्रदान किया जाता है, उसे पत्र-लेखन कहते हैं। विद्यालय में भी कई अवसरों पर हमें अपने प्राचार्य को प्रार्थना-पत्र लिखने पड़ते हैं। कभी-कभी हम अपने गाँव या नगर के बाहर के किसी पुस्तक विक्रेता से अपनी जरूरत की पुस्तकें भी मँगाते हैं। इसके लिए भी हमें पत्र लिखना पड़ता है। इस तरह हम यह कह सकते हैं कि पत्र व्यवहार हम सबके लिए अनिवार्य हो गया है।

 

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  patra lekhan hindi, -पत्र के प्रकार

पत्र व्यक्ति के सुख-दुःख का सजीव संवाहक होने के साथ यह पत्र-लेखक के व्यक्तित्व का प्रतिबिम्ब भी होता है। निजी जीवन से लेकर व्यापार को बढ़ाने अथवा कार्यालय/संस्थानों में परस्पर सम्पर्क का साधन पत्र ही है। पत्र की इन सभी उपयोगिताओं को देखते हुए पत्रों को मुख्यतः दो वर्गों में विभाजित किया जाता है जो निम्नलिखित हैं। 

1.अनौपचारिक पत्र (Informal letter)-इस तरह के पत्र अपने सगे-संबंधियों एवं मित्रों को लिखे जाते हैं। जैसे-माता-पिता, भाई-बहन, चाचा-चाची, मित्र आदि के लिए लिखा गया पत्र।

2.औपचारिक पत्र (Formal Letter)-इस तरह के पत्र कार्यालय से संबंधित होते हैं। जैसे-प्रधानाचार्य, अधिकारी, व्यापारिक वर्ग आदि के लिए इस तरह के पत्र लेखन का प्रयोग होता है।


hindi mein patra पत्र की विशेषताएँ

पत्र लेखन एक कला है। पत्र की निम्नलिखित विशेषताएँ होती हैं-

1. भाषा की संक्षिप्तता पत्र लेखन में अपने भावों एवं विचारों को संक्षिप्त रूप में अभिव्यक्त किया जाना चाहिए। पत्र में अनावश्यक रूप से विस्तार नहीं दिया जाना चाहिए। पत्र में व्यर्थ के शब्दों से भी बचा जाना आवश्यक है।

2. क्रमबद्धता पत्र लेखन करते समय क्रमबद्धता का ध्यान रखा जाना अति आवश्यक है, जो बात पत्र में पहले लिखी जानी चाहिए उसे पत्र में प्रारम्भ में तथा बाद में लिखी जाने वाली बात को अन्त में ही लिखा जाना चाहिए।

3. भाषा की स्पष्टता एवं सरलता पत्र की भाषा पूरी तरह सरल व स्पष्ट होनी चाहिए। भाषा में स्पष्टता का गुण न होने पर पत्र पढ़ने वाला पत्र-लेखक के भावों को समझ नहीं पाएगा। स्पष्टत: पत्र लिखते समय प्रचलित शब्दों एवं सरल वाक्यों का प्रयोग किया जाना चाहिए। कठिन भाषा से पत्र नीरस हो जाता है।

4. प्रभावपूर्ण शैली पत्र की भाषा शैली प्रभावपूर्ण होनी चाहिए जिससे पाठक पत्र-लेखक के भावों को सरलता से समझ सके। पत्र की भाषा मौलिक होनी चाहिए। अनावश्यक शब्दों एवं भाषा का प्रयोग करके आकर्षक पत्र नहीं लिखा जा सकता।

4. उद्देश्यपूर्ण पत्र इस प्रकार लिखा जाना चाहिए जिससे पाठक की हर जिज्ञासा शान्त हो जाए। पत्र अधूरा नहीं होना चाहिए। पत्र में जिन बातों का उल्लेख किया जाना निश्चित हो उसका उल्लेख पत्र में निश्चित तौर पर किया जाना चाहिए। पत्र पूरा होने पर उसे एक बार अन्त में पुनः पढ़ लेना चाहिए।


# पत्र लेखन संबंधी कुछ आवश्यक बातें-

 

पत्र लिखते समय स्थान (जहां से पत्र लिखा जा रहा है), दिनांक, उचित संबोधन का विशेष ध्यान रखना वाहिए।

1.पत्र की भाषा सरल एवं स्पष्ट होनी चाहिए।

2.पत्र का विषय सुलझा हुआ होना चाहिए।

3.अनावश्यक बातों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

4.कम शब्दों में पत्र के उद्देश्य को अधिक से अधिक स्पष्टता के साथ प्रकट करना चाहिए।

5.भाषा की शालीनता का ध्यान रखना चाहिए।

      

# पत्र लेखन के उदाहरण


# अपने भाई के शुभ-विवाह में सम्मिलित होने हेतु अपने प्रधानाचार्य को अवकाश के लिए प्रार्थना-पत्र लिखिए।


अवकाश के लिए प्रार्थना-पत्र

सेवा में,

प्रधानाचार्य महोदय

राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय,

.......... (.... ....)

 

मान्यवर,

सविनय निवेदन है कि मेरे बड़े भाई का शुभ विवाह 21 नवम्बर, 20…..को होना निश्चित हुआ है। बरात रीवा शहर की सिविल लाइन्स स्थित मान्धाता धर्मशाला के लिए दिनांक 21 नवम्बर, 20……….को ही प्रातः 6 बजे बस द्वारा प्रस्थान करेगी। मैं स्वयं बरात में सम्मिलित होऊँगा। अत: मुझे तीन दिन (दिनांक 20 नवम्बर, 20……..से दिनांक 22 नवम्बर, 20……) का अवकाश प्रदान करने की कृपा करें।

 

सधन्यवाद

दिनांकः 19 नवम्बर, 20……

 

आपका आज्ञाकारी शिष्य

.....................

कक्षा  - 9 अ

 

# परीक्षा की तैयारी का उल्लेख करते हुए रुपये मँगवाने के लिए अपने पिताजी को एक पत्र लिखिए।


पिताजी को पत्र

कक्ष सं. 10. नेहरू आश्रम हॉस्टल,

गोलबाजार रोड , इन्दौर (म. प्र)

दिनांक 12.02.20……

 

पूज्य पिताजी,

सादर चरण स्पर्श!

आपका पत्र मिला। पत्र पढ़कर प्रसन्नता हुई। मैं आजकल ‘अपनी अर्द्ध वार्षिक परीक्षाओं की तैयारी में लगा हुआ हूँ। प्रतिदिन छ: या सात घण्टे तक पढ़ाई में लगा रहता हूँ। मैं अभी तक लगभग सभी विषयों का अध्ययन कर चुका हूँ। पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दे रहा हूँ। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि पिछली कक्षाओं की तरह इस कक्षा में भी सर्वोच्च अंक प्राप्त कर सकूँगा। मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि मैं आपके सम्मान में चार चाँद ही लगाऊँगा। मुझे कुछ धन की आवश्यकता है, कृपया पाँच सौ रुपये मनीऑर्डर से भेज दीजिए जिससे मैं अपनी अंग्रेजी और गणित की पुस्तकों को खरीद लाऊँ और अपनी पढ़ाई बहुत अच्छी तरह कर सकूँ। आदरणीया माताजी को मेरा चरण स्पर्श कहियेगा।

 

दिनांक: 12.02.20……

आपका प्रिय पुत्र

.......................

 

# प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए अपने मित्र को एक बधाई पत्र लिखिए।


मित्र को बधाई पत्र


प्रिय मित्र रामन ,

सप्रेम ,

आज प्रातकालः ‘दैनिक जागरण’ समाचार-पत्र में तुम्हारा अनुक्रमांक देखा तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। तुम प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए हो। मैं स्वयं को अति भाग्यशाली समझता हूँ कि मैंने तुम जैसे योग्य, चतुर, बुद्धिमान मित्र को प्राप्त किया है। इस सन्दर्भ में मैं तुम्हें अपनी हार्दिक बधाइयाँ देता हूँ और आशा करता हूँ कि तुम अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त करोगे और अपने जीवन में सफलताओं के शिखर को प्राप्त करोगे। अपने माता-पिता को मेरी ओर से चरण स्पर्श कहना।

 

तुम्हारा मित्र

गजेंद्र राणा 

 


# अपने छोटे भाई की कुशल क्षेम जानने के लिए पत्र लिखिए।


छोटे भाई को पत्र


प्रिय अनुज नीरज ,

शुभाशीर्वाद।

कल तुम्हारा भेजा हुआ पत्र प्राप्त हुआ, तुम्हारा कुशल क्षेम जानकर हार्दिक प्रसन्नता का अनुभव हुआ। तुम्हें यह समाचार देते हुए प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है कि मैंने तुम्हारे लिए कहानी तथा चुटकुलों की कुछ पुस्तकें खरीद ली हैं। अब आऊँगा तो सबके लिए कुछ मिष्ठान तथा नमकीन भी लाऊँगा। कुंजन के लिए एक अच्छी-सी साड़ी भी लेकर आऊँगा। यहाँ तुम्हारे भतीजे तथा भाभी पूरी तरह स्वस्थ एवं सानन्द हैं। वे सब तुम्हारे पत्र को बार-बार पढ़कर सुखानुभूति करते हैं। मैं 12 जून को प्रात:काल वाली ट्रेन से आऊँगा।


माताजी एवं पिताजी को सादर प्रणाम तथा छोटों को प्यार। शेष सब ठीक है।


    शुभेच्छु

गौतम भार्गव 

 

 

# तुम्हारे पिताजी या अभिभावक का स्थानान्तरण हो जाने के कारण विद्यालय छोड़ने का प्रमाण-पत्र (टी.सी) प्राप्त करने हेतु आवेदन-पत्र लिखिए।


प्रधानाचार्य को विद्यालय छोड़ने

का प्रमाण-पत्र प्राप्त करने हेतु आवेदन-पत्र

 

सेवा में,

प्रधानाध्यापक महोदय,

शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय,

उदयपुर ।

 

महोदय,

सेवा में विनम्र प्रार्थना है कि मैं आपके विद्यालय में कक्षा 9 वीं का संस्थागत छात्र हूँ। मेरे अभिभावक का स्थानान्तरण हो गया है। इस हेतु मैं आपके विद्यालय में आगे अपना अध्ययन करने में असमर्थ हूँ। अत: मुझे विद्यालय त्यागने का प्रमाण-पत्र देने हेतु आदेश करें। मैंने अपना समस्त शुल्क तथा पुस्तकालय की ली हुई पुस्तकें भी लौटा दी हैं। मेरे पास विद्यालय का कुछ भी देने को शेष नहीं है। आशा है कि आप सहयोग देकर अनुगृहीत करेंगे।

 

दिनांक: 10 .12 .20…..

 

आपका आज्ञाकारी शिष्य

रामविलास पासवान 

कक्षा IX- अ 

 

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