ताज महल कब बना था? | taj mahal kab bana tha

 taj mahal kab bana tha ताज महल कब बना था?


 taj mahal kab bana tha 

ताज महल का इतिहास   

ताज महल भारत की ऐसी ईमारत है जिसे पूरी दुनिया में ख्याति प्राप्त है। और Tourists के मन पसंद जगहों में शामिल भी है। यह खूबसूरत ईमारत भारत के  उत्तर प्रदेश राज्य में यमुना नदी के किनारे बना हुआ है। 

इसके निर्माण में सफेद मार्बल का उपयोग किया गया है जो इसे बहुत ही ज्यादा सुंदरता प्रदान करता है। यह ईमारत लोगों के बीच प्यार की निसानी के नाम से बहुत प्रसिद्ध है। 

इस का निर्माण मुग़ल शासक शाहजहाँ ने अपनी सबसे प्रिय पत्नी मुमताज की याद में उसकी मृत्यु के बाद बनवाया था। जिस में आज भी शाहजहाँ और मुमताज की कब्र है। यह एक तरह का बहुत खूबसूरत मकबरा है। इस जगह पहुंचने का अच्छा समय सुबह सुबह और शाम का होता है जब इसकी सुंदरता और भी सुन्दर हो जाती है।
 

 यह भी पढ़ें :-  क़ुतुब मीनार 

                      खजुराहो के वल्ड फेमस मंदिर 


ताजमहल का निर्माण शाहजहां ने करवाया था ताजमहल को बनाने मे करीब 38 वर्ष लगे थे। 1 सितम्बर 1593 से 17 जून 1631 तक का समय ताज महल को बनवाने में लगा था। मुमताज महल परसिया देश की राजकुमारी थी जिसने मुग़ल सम्राट जहांगीर से निकाह किया था और जहांगीर ने मुमताज की याद में ताजमहल बनवाया था। 

taj mahal kab bana tha
taj mahal kab bana tha

ताज महल का इतिहास

taj mahal kab bana

1631 के बाद ही शाहजहाँ ने आधिकारिक रूप से ताजमहल का निर्माण कार्य की घोषणा की तथा 1632 में ताजमहल का निर्माण कार्य शुरू कर दिया। 

ताजमहल के निर्माण में काफी समय लगा. वैसे तो इस मकबरे का निर्माण 1643 में ही पूरा हो गया था, परंतु इसके सभी पहलुओं के काम करते करते इसे बनाने में लगभग दस साल और लग गए। 

सम्पूर्ण ताजमहल का निर्माण 1653 में लगभग 320 लाख रुपये की लागत में हुआ, जिसकी आज की कीमत 52.8 अरब रुपये (827 मिल्यन डॉलर) है। 

इसके निर्माण में 20,000 कारीगरों ने मुग़ल शिल्पकार उस्ताद अहमद लाहौरी के अधीन कार्य किया, कहते हैं कि इसके निर्माण के बाद शाहजहाँ ने अपने सभी कारीगरों के हाथ कटवा दिये। 

यह भी पढ़ें :-  क़ुतुब मीनार 

                      खजुराहो के वल्ड फेमस कामुक मंदिर 

मुझे उम्मीद है आपको यह जानकारी  taj mahal kab bana tha पसंद आई होगी। अपने हमे इतना समय दिया आपका बहुत धन्यवाद। 

इस गृह पर होंगी मनुष्य की अगली पीढ़ियों का जन्म।